मार्च 2007 को समाप्त वर्ष में आईडीबीआई बैंक के कुल अग्रिम 1387 करोड़ रुपये थे. इस राशि में 6924 करोड़ रुपये (लगभग 500%) की वृद्धि होकर मार्च 2009 में यह 8311 करोड़ रुपये हो गई है.
भारत एक ग्रामप्रधान देश है. बरसों से कृषि और उससे जुड़ी गतिविधियाँ हमारी ग्रामीण जनता की रोजी-रोटी का प्रमुख साधन रही हैं. कृषि क्षेत्र 60% से अधिक जनसंख्या के लिए रोजगार और जीविका के साधन प्रदान करता है. संसाधित भोजन के प्रति उपभोक्ताओं की बदलती हुई प्रवृत्ति के कारण भोजन तथा कृषि संसाधन उद्योग की बढ़ती मांग के चलते कृषि और उद्योग के बीच का संबंध और अधिक मजबूत हो गया है. इस पृष्ठभूमि में, भारतीय उद्योग जगत ने कृषि में नए अवसर खोजने आरंभ कर दिए हैं.
प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्र में कृषि और अनुषंगी गतिविधियाँ शामिल हैं. उभरते हुए आधुनिक आर्थिक तंत्र ने कृषि क्षेत्र को कारोबारी मॉडलों के आधार पर संस्थागत रूप प्रदान कर दिया है. कृषि कारोबार एक व्यापक अभिव्यक्ति है जिसमें कृषि से संबंधित बहुत से कारोबार जैसे कि भोजन उत्पादन, कृषि, कृषि रसायन, कृषि मशीनरी, भंडारण, थोक तथा वितरण और संसाधन, विपणन तथा भोजन उत्पादों की बिक्री आदि शामिल हैं.
आईडीबीआई बैंक कृषि क्षेत्र को ऋण प्रदान करने पर सतत जोर देता रहा है. बैंक ने ग्रामीण जनता के सामाजिक-आर्थिक उत्थान के लिए प्राप्य फसलों, वेयरहाउस रसीद, संविदा खेती पर ऋण आदि जैसी कई कृषि उत्पाद आधारित योजनाएं आरंभ की हैं.