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एमएसएमई > नीति > एमएसएमई पुनर्संरचना/पुनर्वास नीति

एमएसएमई पुनर्संरचना/पुनर्वास नीति

1 प्रस्ता-वना
  1.1 बैंक की का उद्देश्यं संभावित रूप से अर्थक्षम सूक्ष्म , लघु और मझोले(एमएसएमई) उद्यमों, जो संकट के दौर से गुजर रहे हैं, के ऋणों की पुनर्संरचना के लिए समयबद्ध और पारदर्शी व्यरवस्थां प्रदान करना तथा आस्तियों के आर्थिक मूल्ये को बनाए रखना है. विशेषकर, रूपरेखा का उद्देश्यक उन अर्थक्षम एमएसएमई उद्यमों, जो कुछ आंतरिक और और वाह्य कारणों से प्रभावित है, को सुरक्षित स्थिति में रखना तथा ऋणदाताओं और अन्यप शेयरधारकों के नुकसान को एक व्यकवस्थित और समन्वित पुनर्संरचना/पुनर्वास कार्यक्रम के माध्यरम से कम करना होगा.
  1.2 पुनर्संरचना प्रक्रिया में अग्रिम/प्रतिभूतियों, जो सामान्यतत: अन्य में शामिल होंगी, की शर्तों में संशोधन, चुकौती की अवधि/चुकौती योग्यस राशि/ब्याअज दर में परिवर्तन(प्रतिस्प र्द्धात्मरक कारणों को छोड़कर), आदि शामिल होंगे.
  1.3 पुनर्वास में ऐसी प्रक्रिया को अपनाया जाएगा जिसमें रुग्‍न एमएसएमई इकाइयों का अर्थक्षम होना सुनिश्चित हो सके. निम्नंलिखित कारणों से किसी इकाई को रुग्ना माना जाएगा :
    क. यदि उद्यम का कोई उधार खाता तीन माह या उससे अधिक समय तक अनर्जक आस्ति के रूप में रहता है
      या
    ख. पिछले लेखांकन वर्ष के दौरान संचित नुकसान के कारण निवल मालियम में, निवल मालियत के 50 प्रतिशत की सीमा तक गिरावट हो.
 
2 कार्यक्षेत्र
  2.1 यह नीति अर्थक्षम या संभावित रूप से अर्थक्षम निम्नसलिखित इकाइयों पर लागू होगी:
    क. सभी गैर कॉर्पोरेट सूक्ष्मा, लघु और मझोले उद्यम(एमएसएमई) जिसमें बैंक के प्रति बकाया की मात्रा पर ध्या‍न नहीं दिया जाएगा.
    ख. सभी कॉर्पोरेट एमएसएमई जो किसी एकल बैंक से बैंकिंग सुविधा का लाभ उठा रहे हैं. इसमें किसी बैंक के प्रति बकाया की मात्रा पर ध्याउन नहीं दिया जाएगा.
    ग. सभी कॉर्पोरेट एमएसएमई जिनके पास बहु/कॉन्सामर्टियम बैंकिंग व्यनवस्था के अधीन निधिक और गैर निधिक बकाया 10 करोड़ रु. तक हो.
    घ. सभी कॉर्पोरेट एमएसएमई जिनके पास बहु/कॉन्सानर्टियम बैंकिंग व्य वस्थास के अधीन निधिक और गैर निधिक बकाया 10 करोड़ रु. तक हो उनकी पुनर्संरचना सीडीआर व्यगवस्थाा के अंतर्गत की जाएगी. बीआईएफआर मामले में, पुनर्संरचना/पुनर्वास पैकेज लागू करने से पहले बीआईएफआर से अनुमति ली जाएगी.
 
  2.2 पुनर्संचना/पुनर्वास की पात्रता नहीं रखनेवाले खाते
    क. जानबूझकर चूक/कुव्य वस्थाे, धोखाधड़ी और अपकरण, निधियों का अप्राधिकृत रूप से विपथन, साझेदारों/प्रवर्तकों में विवाद वाले खाते.
    ख. बैंक द्वारा “हानि आस्ति” के रूप में वर्गीकृत खाते.
 
3 अग्रिम की पुनर्संरचना के लिए सामान्यि सिद्धांत
  3.1 ‘मानक’, ‘अवनानक’ और ‘संदिग्धग’ श्रेणियों में वर्गीकृत खातों के लिए पुनर्संरचना लागू होगी.
  3.2 बैंक सामान्य. तौर पर उधार खातों के बारे में पूर्वव्यागपी तारीख से पुननिर्धारण/पुनर्संरचना/पुनर्समझौता नहीं करेगा. वसूली नहीं किए गए ब्यापज के निधियन पर पूर्वव्यासपी पुनर्संरचना के रूप में विचार नहीं किया जाएगा.
  3.3 किसी पुनर्संरचना प्रस्ता व के विचाराधीन होने के दौरान, आरबीआई के वर्तमान दिशानिर्देशों के अनुसार आस्ति वर्गीकरण मानदंड लागू रहेगा.
  3.4 पुनर्संरचना औपचारिक सहमति या उधारकर्ता द्वारा प्रस्तु त अनुरोध के अनुसार की जाएगी.
  3.5 3.5 अगिमों के लिए पुनर्संरचना की अनुमति निम्न्लिखित स्तथरों पर प्रदान की जाएगी :
    क. वाणिज्यिक उत्पािदन/परिचालन शुरु होने से पहले,
    ख. वाणिज्यिक उत्पािदन/परिचालन शुरु होने के बाद, लेकिन आस्ति को ‘अवमानक’ रूप में वर्गीकृत करने से पहले,
    ग. वाणिज्यिक उत्पा दन/परिचालन शुरु होने के बाद तथा आस्ति का वर्गीकरण ‘अवमानक’ और ‘संदिग्धु’ के रूप में कर दिया गया हो.
  3.6 पुनर्संरचना पैकेज की शर्तों के अनुसार, पुनर्संरचना इकाई के बारे में वित्तीय व्यरवहार्यता प्रमाणित होने तथा उधारकर्ता से चुकौती की पक्कीब उम्मी द होने के बाद ही की जाएगी.
 
4 रुग्न एमएसई के पुनर्वास के लिए सामान्य् सिद्धांत
  4.1 रुग्न ता के आरंभिक लक्षण के बारे में पता चलने के बाद पुनर्वास प्रक्रिया शुरु की जाएगी. इस अवस्था को ‘सहारा अवस्थान’ कही जाएगी.
  4.2 निम्ननलिखित में से कोई भी घटित होने पर किसी खाता को ‘सहारा अवस्थाी’ में पहुँचना समझा जाएगा :
    क. प्रवर्तकों के नियंत्रण से बाहर कारणों से वाणिज्यिक उत्पापदन शुरु होने में 6 माह से अधिक विलंब,
    ख. स्वीबकृत समयसीमा के बाद कंपनी द्वारा दो वर्ष तक नुकसान उठाने या एक वर्ष तक नकदी नुकसान उठाने पर,
    ग. वर्ष के दौरान क्षमता-उपयोग मात्रा की दृष्टि से पूर्वानुमानित स्तेर से 50% से नीचे है या बिक्री मूल्यय की दृष्टि से पूर्वानुमानित स्त र से 50% से नीचे है
  4.3 बैंक समय पर सुधारात्मरक कार्रवाई करेगा जिसमें इकाई के परिचालन के बारे में जॉंच और खातों की उचित जॉंच, मार्गदर्शन/परामर्श सेवाएं प्रदान करना, निर्धारित आवश्यसकताओं के अनुसार समय पर वित्तीय सहायता तथा साथ ही इकाई संबंधी गैर वित्तीय प्रकृति की कठिनाइयों के समाधान में मदद या अन्यम एजेंसियों से सहायता की जरुरत शामिल है. सुधारात्महक कार्रवाई/उपाय ऐसे इकाइयों की पहचान से अधिकतम दो माह के भीतर की जाएगी.
  4.4 जिन एमएसई इकाइयों को ‘सहारा अवस्थां’ में बैंकों के हस्तयक्षेप के बाद भी फिर से खड़ा नहीं किया जा सकता उनको रुग्नस के रूप में वर्गीकृत कर दिया जाएगा, बशर्तेकि उपर्युक्त पैरा 1.3 में निर्धारण के अनुसार दो में से किसी एक शर्त का पालन किया जाए, तथा लाभप्रदता अघ्यायन के आधार पर, अर्थक्षम/संभावित रूप से व्यनवहार्य इकाइयों को पुनर्वास पैकेज प्रदान किया जाएगा.
  4.5 इकाई की अर्थक्षमता के बारे में निर्णय शीघ्रातिशीघ्र लिया जाएगा, लेकिन इसमें इकाई के रुग्न् होने/पुनर्संरचना संबंधी आवेदन पत्र प्राप्त् होने से तीन माह की अवधि से अधिक समय नहीं लगेगा.
  4.6 इकाई की अर्थक्षमता के बारे में उचित अघ्य्यन के माध्य म से अर्थक्षमता संबंधी पता लगाने के बाद ही किसी इकाई को अलाभकारी घोषित किया जाएगा. तथापि, सूक्ष्मे (विनिर्माण) उद्यम जिनमें संयत्र और मशीनरी पर 5 लाख रु. तक निवेश है और सूक्ष्म् (सेवा) उद्यम जिनमें उपकरणों पर 2 लाख रु. तक का निवेश है, के बारे में शाखा प्रबंधक अर्थक्षमता के बारे में निर्णय ले पाएंगे तथा उक्ती के बारे में तर्क सहित रिकॉर्ड करेंगे.
  4.7 इकाई को अलाभकारी घोषित किए जाने के मामले में, इकाई को, बैंक से इस बारे में सूचना मिलने की तारीख से एक माह के भीतर अपने मामले को बैंक के सक्षम प्राधिकारी के पास प्रस्‍तुत करने का मौका दिया जाएगा. जाएगा.
  4.8 इकाई के बारे प्रस्‍तुत अभ्यादवेदन पर निर्णय सामान्य त: दो माह के भीतर लिया जाएगा.
 
5 पुनर्संरचना/पुनर्वास प्रस्ताेव के कार्यान्वायन के लिए समय-सीमा
  उधारकर्ता से पुनर्संरचना संबंधी आवेदन पत्र प्राप्ते होने की तारीख से नब्बेा दिनों के भीतर पुनर्संरचना पैकेज लागू की जाएगी, जबकि पुनर्वास पैकेज इकाई के अर्थक्षम/संभावित रूप से अर्थक्षम घोषित किए जाने की तारीख से छह माह के भीतर पूरी तरह लागू कर दिया जाएगा. पुनर्वास पैकेज की पहचान और लागूकरण की छह माह की अवधि के दौरान बैंक ‘धारिता परिचालन’ की अनुमति देगा जिसमें रुग्ना इकाई को कम-से-कम बिक्री से प्राप्तप राशि की जमा सीमा तक नकदी ऋण खाता से निधि निकालने की अनुमति होगी.
 
6 पुनर्संरचना के बाद आस्ति वर्गीकरण
  पुनर्संरचित खातों के बारे में आय-निर्धारण, आस्ति वर्गीकरण और प्रावधानीकरण आरबीआई द्वारा समय-समय पर जारी दिशानिर्देशों के अनुसार होगा.
 
7 सहायता और रियायत
  पुनर्संरचना/पुनर्वास पैकेज के अंतर्गत प्रदान की जानेवाली सहायता और रियायत वैयक्तिक खातों की अर्थक्षमता पर निर्भर करेंगे तथा इनमें मामलों के आधार पर अंतर हो सकता है.
 
8 पुनर्संरचना शुल्कक
  बैंक के मानदंड के अनुसार
 
9 पुनर्वास/पुनर्संरचना के प्रति दृष्टिकोण
  बैंक इकाई की अर्थक्षमता के आधार पर पुनर्संरचना/पुनर्वास पैकेज पर विचार करेगा तथा अन्यई के साथ-साथ निम्नंलिखित अधिकारों का प्रयोग करेगा :

  (i) कुशल निवेशक/सह प्रवर्तक को शामिल करने का अधिकार,
  (ii) विशेष संगामी लेखा परीक्षक नियुक्तम करने का अधिकार
  (iii) सांविधिक लेखा परीक्षकों को बदलने का अधिकार
  (iv) उधारदाताओं के इंजीनियर/निगरानी एजेंसी नियुक्ति करने का अधिकार
  (v) चुकौती तेजी से बढ़ाने/पैकेज रद्द करने का अधिकार
  (vi) क्षतिपूर्ति का अधिकार
  (vii) नामिती निदेशक नियुक्त करने का अधिकार
  (viii) चूक के मामले में बैंक के बकाया को इक्विटी में परिवर्तन का अधिकार
  (ix) प्रवर्तक के शेयरों के गिरवी सहित अतिरिक्तं प्रतिभूति, वैयक्तिक गारंटी, आदि प्राप्तव करने का अधिकार
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